Thursday, December 25, 2014

नहीं बनती कोई सूरत कि तेरे दर को हम आएँ .. तमन्ना घुट रही खामोश, हसरत ख़ुद पे शरमाए

@KrAnubhavJha: नहीं बनती कोई सूरत कि तेरे दर को हम आएँ ..
तमन्ना घुट रही खामोश, हसरत ख़ुद पे शरमाए



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