Saturday, December 20, 2014

"भँवर में हैं सफ़ीना रात का पतवार छूटी है किनारे दर्द की बस्ती के साहूकार बैठे हैं तुम्हारे ख़्वाब में आने की हसरत...

@DrKumarVishwas: "भँवर में हैं सफ़ीना रात का पतवार छूटी है
किनारे दर्द की बस्ती के साहूकार बैठे हैं
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