Monday, November 10, 2014

माना ! रात के अंधेरों में सपने गुम हो जाते हैं... सूरज, रोज़ सवेरे फिर से आस के दीप जलाता है

@albellee: माना ! रात के अंधेरों में सपने गुम हो जाते हैं...
सूरज, रोज़ सवेरे फिर से आस के दीप जलाता है



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