Friday, November 21, 2014

इब्तिदा वो थी की जीने के लिए मरते थे हम.. इंतिहा ये है कि मरने की भी हसरत न रही

@albellee: इब्तिदा वो थी की जीने के लिए मरते थे हम..
इंतिहा ये है कि मरने की भी हसरत न रही



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